Sayyam Jeevan 52 years Completion @ RATLAM

 

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Date: 21st Sept 2019 LIVE

Date: 17th Sept 2019 Explained

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उत्तराध्ययन सूत्र: छठा अध्ययन

• संसार में दुःख का एक ही कारण है- अज्ञान । अज्ञान अर्थात सम्यक् बोध का अभाव ।
अज्ञान दो प्रकार के –
i. बोध का अभाव (गटर सामने है, पर दिख नहीं रही।)
ii. विपरीत बोध ( गटर में गंगा का दर्शन और गंगा में गटर का दर्शन)
संसार में दुःख , विपरीत बोध के कारण है। विपरीत बोध, भ्रमणा है।

सम्यक् बोध होगा तो जीवन में दुःख नहीं रहेगा।
[सम्यक् बोध अर्थात् सम्यक् ज्ञान- गंगा में गंगा का दर्शन और गटर में गटर का दर्शन।]

इन चार के बारे में सम्यक् बोध जीवन में आ जाए तो दुःख जीवन में नहीं रहेगा; पाप त्याग और धर्म प्रवृत्ति में हम तेजी से आगे बढ़ पायेंगे:

1. Disease call
रोग कभी भी आ सकता है।

दुनिया के सभी सुखों का आधार शरीर है। बिना संपत्ति, सौंदर्य या सत्ता , मन को प्रसन्न रख सकते हैं, पर बिना स्वास्थ्य उसे प्रसन्न नहीं रख सकते । परंतु, हमेशा स्वस्थ बने रहना कठिन है। बीमारी आने वाली ही है.. प्रश्न सिर्फ समय का है।
– disease call आ जाएगा तब समाधि का क्या होगा?
रोग आने पर हर बात में नकारात्मक रवैया, चिड़चिड़ापन हो जाता है।

चूंकि disease call कभी भी आ सकता है, उससे निपटने के लिए, उस समय मन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हमारी तैयारी क्या ?

समाधि – जिस चीज पर आपका मन गया है, केंद्रित हो गया है उससे मन divert कर देना, यह है समाधि ।
बीमारी के समय मन की समाधि बनाए रखने के लिए इस तरह की सम्यक् समझ-understanding- विकसित करनी पड़ेगी:
i मैं शरीर नहीं हूं; शरीर और मन को चलाने वाला आत्मा हूं । जीवन की समाप्ति हो सकती है, अस्तित्व की नहीं- इस जीवन के बाद भी कोई नया जीवन तो मिलने वाला ही है ।
ii रोग शरीर में पैदा होता है , उसे शरीर तक ही रहने देना है, मन तक नहीं लाना है ।

इस तरह की सम्यक् समझ से मन की समाधि बनी रहेगी।
और
मन में यदि दोष पैदा हो गया है तो उसे शरीर तक नहीं जाने देना है ( ऐसी समझ से पतन नहीं होगा) ।

(2) Deadline call
पुण्य कभी भी समाप्त हो सकता है।

• दिन-ब-दिन हमारा पुण्य कम होता जाता है। कभी भी संबंधो का, प्रतिष्ठा का, सम्पत्ति का पुण्य समाप्त हो सकता है ।
• समय, स्थान और संयोग के परिवर्तन के साथ भी पुण्य समाप्त हो सकता है।
• जीवन में सफलता उसको मिलती है जिसके पास पुण्य ज्यादा होता है। सफलता को सज्जनता से कुछ लेना-देना नहीं है, पुण्य जिसके पास होगा उसके पास वह जाएगी ।
• जीवन में पुण्य और पुरुषार्थ, दोनों की आवश्यकता होती है।
• परीक्षा देने वाले विद्यार्थी को परीक्षा की तैयारी के लिए समय मिलेगा, पर fire brigade वालों को समय नहीं मिलेगा, उसे हर समय prepared रहना पड़ता है। इसी तरह, साधना के लिए समय मिलेगा, समाधि के लिए नहीं मिलेगा! समाधि के लिए हर वक्त तैयार रहना पड़ेगा।
• Deadline call आने पर भी समाधि कैसे टिकाए रखना ?
…… जीवन में पाप कम करो और deadline call आने पर परिस्थिति से समाधान कर लो।

(3) Destiny call
Destiny अर्थात् नियति ।

• सम्यक् पुरुषार्थ के बाद भी अपेक्षित परिणाम न मिले तब उसे नियति (भवितव्यता ) मानकर स्वीकार कर लेना।
पुरुषार्थ के बाद भी अपेक्षित परिणाम न मिले तो दुःखी नहीं होना । मैने तो हर सम्भव पुरुषार्थ किया है, इस बात का संतोष मानना ।
( पर हाँ, बिना पुरुषार्थ के destiny पर छोड़ देना, यह मन की बदमाशी है)

• पुरुषार्थ के बाद भी इच्छित परिणाम न मिले तो इनमें से किसी एक कील पर मन का बोझ टांग देना-
i भगवान को जो अच्छा लगा वह ठीक ।
ii कोई बात नहीं, मेरा पुण्य शायद कम पड़ गया ।

(4) Death call
मानव जीवन की समाप्ति – wind-up
• उत्तराध्ययन सूत्र में लिखा है-
हे मानव ! तेरा जीवन इसलिए चल रहा है कि मृत्यु अभी प्रमाद में है, मृत्यु का प्रमाद अर्थात् तेरा जीवन !!
जिस दिन मृत्यु जाग्रत हो जायेगी, तेरी एक भी धड़कन आगे नहीं चलेगी। इसलिये मौत आने से पहले जीवन में जो अच्छा करना है कर ले।
• मृत्यु के समय की हमारी तैयारी कितनी ? क्या चेहरे की मुस्कान के साथ मृत्यु को स्वीकार कर पायेंगे ?
प्रभु से प्रार्थना करें कि, हे प्रभु ! मौत आये तब मेरी समाधि बनी रहे ।
हममें यदि सम्यक् समझ होगी तो मृत्यु के समय मन की समाधि बनी रहेगी।

[ जो सत्य हृदय को छुता है वह है समझ या understanding । जो सत्य केवल बुद्धि को छुता है वह है knowing ]

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